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indian societies act 1860

  सोसायटीज़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 परिचय सोसायटीज़ रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 भारत में सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए बनाई गई संस्थाओं के पंजीकरण के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। सोसायटी क्या है? सोसायटी सात या उससे अधिक व्यक्तियों का समूह है जो एक साझा उद्देश्य के लिए एक साथ काम करते हैं। यह एक गैर-लाभकारी संगठन है जो सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, या शैक्षिक उद्देश्यों के लिए काम करता है। सोसायटी पंजीकरण के लाभ सीमित देयता:  पंजीकृत सोसायटी के सदस्यों की व्यक्तिगत देयता सोसायटी की संपत्ति तक सीमित होती है। कर लाभ:  पंजीकृत सोसायटी को आयकर और अन्य करों में छूट प्राप्त हो सकती है। कानूनी मान्यता:  पंजीकृत सोसायटी को एक कानूनी इकाई के रूप में मान्यता प्राप्त होती है। सरकारी अनुदान:  पंजीकृत सोसायटी सरकारी अनुदान और सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र हो सकती है। सोसायटी पंजीकरण की प्रक्रिया सोसायटी पंजीकरण की प्रक्रिया राज्य से राज्य में भिन्न होती है। आम तौर पर, निम्नलिखित दस्तावेजों को सोसायटी पंजीकरण के लिए प्रस्तुत करना होता है:...

indian trust act 1882

  सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट: इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, 1882 परिचय सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट, जिसे लोकहितकारी न्यास भी कहा जाता है, एक गैर-लाभकारी संस्था है जो धर्मार्थ कार्यों के लिए बनाई जाती है। यह इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, 1882 द्वारा शासित होता है। इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, 1882 यह अधिनियम भारत में ट्रस्टों के निर्माण, संचालन और विघटन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह अधिनियम निम्नलिखित बातों को परिभाषित करता है: ट्रस्ट:  ट्रस्ट एक व्यवस्था है जिसमें एक व्यक्ति (सेटलर) संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति (ट्रस्टी) को हस्तांतरित करता है, जिसे उस संपत्ति का उपयोग विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लाभार्थियों के लाभ के लिए करना होता है। सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट:  यह एक ऐसा ट्रस्ट है जो धर्मार्थ कार्यों के लिए बनाया जाता है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आदि। ट्रस्टी:  ट्रस्टी वह व्यक्ति है जो ट्रस्ट की संपत्ति का प्रबंधन करता है और यह सुनिश्चित करता है कि इसका उपयोग ट्रस्ट के उद्देश्यों के लिए किया जाए। लाभार्थी:  लाभार्थी वह व्यक्ति या समूह है जो ट्रस्ट से लाभान्वित हो...

optional clauses for a trust deed

  सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट विलेख में वैकल्पिक खंड (Optional Clauses): लचीलापन और विस्तार सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना करते समय, ट्रस्ट विलेख (deed) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जो ट्रस्ट के उद्देश्य, संरचना और संचालन का निर्धारण करता है। हालांकि, ट्रस्ट विलेख में कुछ "आवश्यक" खंड होते हैं, लेकिन इसमें कुछ "वैकल्पिक" खंड भी शामिल किए जा सकते हैं जो ट्रस्ट को अधिक लचीलापन और विस्तार प्रदान करते हैं। आइए, ऐसे ही कुछ वैकल्पिक खंडों पर गौर करें: 1. प्रॉक्सी वोटिंग (Proxy Voting): यह खंड अनुपस्थित ट्रस्टियों को किसी अन्य सदस्य को प्रॉक्सी के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है। प्रॉक्सी सदस्य की ओर से बैठकों में उपस्थित हो सकता है और मतदान कर सकता है। 2. कार्यकारी समिति (Executive Committee): यह खंड ट्रस्टियों के एक छोटे समूह को ट्रस्ट के दैनिक कार्यों का प्रबंधन करने के लिए "कार्यकारी समिति" के रूप में गठित करने का प्रावधान कर सकता है। 3. संशोधन खंड (Amendment Clause): यह खंड भविष्य में ट्रस्ट विलेख में संशोधन करने की प्रक्रिया को निर्धारित करता ह...

various optional clauses for trust deed

  सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट विलेख में वैकल्पिक खंड (Optional Clauses): लचीलापन और विस्तार सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना करते समय, ट्रस्ट विलेख (deed) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जो ट्रस्ट के उद्देश्य, संरचना और संचालन का निर्धारण करता है। हालांकि, ट्रस्ट विलेख में कुछ "आवश्यक" खंड होते हैं, लेकिन इसमें कुछ "वैकल्पिक" खंड भी शामिल किए जा सकते हैं जो ट्रस्ट को अधिक लचीलापन और विस्तार प्रदान करते हैं। आइए, ऐसे ही कुछ वैकल्पिक खंडों पर गौर करें: 1. प्रॉक्सी वोटिंग (Proxy Voting): यह खंड अनुपस्थित ट्रस्टियों को किसी अन्य सदस्य को प्रॉक्सी के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है। प्रॉक्सी सदस्य की ओर से बैठकों में उपस्थित हो सकता है और मतदान कर सकता है। 2. कार्यकारी समिति (Executive Committee): यह खंड ट्रस्टियों के एक छोटे समूह को ट्रस्ट के दैनिक कार्यों का प्रबंधन करने के लिए "कार्यकारी समिति" के रूप में गठित करने का प्रावधान कर सकता है। 3. संशोधन खंड (Amendment Clause): यह खंड भविष्य में ट्रस्ट विलेख में संशोधन करने की प्रक्रिया को निर्धारित करता ह...

compulsory clauses for trust deed format

  सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट विलेख में अनिवार्य खंड (Clauses) सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना करते समय, एक ट्रस्ट विलेख (deed) तैयार करना आवश्यक होता है। यह विलेख ट्रस्ट के गठन, उद्देश्यों, प्रबंधन और संचालन का दस्तावेजी प्रमाण होता है। विलेख में कुछ अनिवार्य खंड होते हैं, जिनका समावेश ट्रस्ट के कानूनी वैधता और सुचारू कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक होता है। आइए, इन अनिवार्य खंडों को विस्तार से समझें: 1. ट्रस्ट का नाम और पंजीकृत पता: विलेख में स्पष्ट रूप से ट्रस्ट का नाम और उसका पंजीकृत पता उल्लेख किया जाना चाहिए। 2. ट्रस्ट के उद्देश्य: विलेख में ट्रस्ट के स्थापना के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से और विस्तार से वर्णित किया जाना चाहिए। उद्देश्य धर्मार्थ प्रकृति के होने चाहिए और किसी भी धार्मिक, सामाजिक या शैक्षणिक क्षेत्र से संबंधित हो सकते हैं। 3. ट्रस्टी (Trustees): विलेख में ट्रस्ट के प्रारंभिक ट्रस्टियों के नाम, पते और पदनामों का उल्लेख होना चाहिए। साथ ही, ट्रस्टियों की नियुक्ति, पदत्याग और हटाने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। 4. लाभार्थी (Beneficiaries)...

format of trust deed

  सार्वजनक धर्मार्थ ट्रस्ट के लिए ट्रस्ट विलेख का प्रारूप (फॉर्मेट) भारत में, सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना के लिए एक ट्रस्ट विलेख (deed) अनिवार्य दस्तावेज होता है। यह विलेख ट्रस्ट के गठन, उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और प्रबंधन का आधारभूत दस्तावेज है। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह ब्लॉग पोस्ट केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है और किसी भी तरह से कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना करते समय एक योग्य वकील से परामर्श करना और उस राज्य के विशिष्ट कानूनों के अनुसार विलेख का मसौदा तैयार करना आवश्यक है। आम तौर पर, एक सार्वजनक धर्मार्थ ट्रस्ट विलेख में निम्नलिखित अनुभाग (sections) शामिल होते हैं: 1. प्रारंभिक (Introductory Clause): ट्रस्ट का नाम, स्थापना की तिथि ट्रस्ट के संस्थापक (settlor) का नाम और पता ट्रस्ट के उद्देश्य का संक्षिप्त विवरण 2. ट्रस्टियों का विवरण (Particulars of Trustees): प्रारंभिक ट्रस्टियों के नाम, पते और पदनाम ट्रस्टियों की नियुक्ति, हटाने और उत्तराधिकार की प्रक्रिया 3. ट्रस्ट का उद्देश्य (Objects of the Trust)...

trusts investing in mutual funds

  सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट और म्यूचुअल फंड में निवेश: क्या यह संभव है? सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट अपने धर्मार्थ कार्यों को पूरा करने के लिए धन जुटाते हैं और उसका निवेश करते हैं। निवेश का उद्देश्य दीर्घकालीन संपत्ति निर्माण करना और ट्रस्ट के कार्यों के लिए निरंतर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना होता है। हालांकि, निवेश के विकल्पों का चयन करते समय ट्रस्टियों को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उन्हें ट्रस्ट के धन की सुरक्षा और उसका दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करना होता है। आइए देखें कि क्या सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं और ऐसा करना उनके लिए फायदेमंद है या नहीं। क्या सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं? जी हां, सार्वजनक धर्मार्थ ट्रस्ट कुछ शर्तों के अधीन म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। ट्रस्ट विलेख की जांच:  सबसे पहले, यह महत्वपूर्ण है कि ट्रस्ट विलेख की जांच की जाए। विलेख में निवेश से संबंधित दिशानिर्दर्श हो सकते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। कुछ ट्रस्ट विलेख निवेश के प्रकारों को प्रतिबंधित कर सकते हैं, इसलिए यह सुनिश्च...